Akashic Dimensions

वैदिक जन्म कुंडली · ज्योतिष

आपकी कुंडली, स्थिर तारों की दृष्टि से।

वैदिक ज्योतिष आकाश को स्वयं तारों के सापेक्ष मापता है। अपना जन्म विवरण भरें और अपनी चौकोर कुंडली को बनते हुए देखें।

  • उत्तर भारतीय कुंडली
  • लग्न
  • चंद्र और नक्षत्र
  • वर्तमान दशा

अपनी कुंडली शुरू करें

आपका जन्म विवरण

जहाँ आपका जन्म हुआ, वहाँ का स्थानीय समय। हो सके तो जन्म प्रमाणपत्र देखें।

कम से कम 3 अक्षर लिखें (जैसे Delhi), फिर सूची से अपना शहर चुनें।

सटीक समय क्यों ज़रूरी है

वैदिक ज्योतिष में लग्न लगभग हर दो घंटे में बदलता है, नवांश लगभग हर तेरह मिनट में, और आपकी दशाओं की तिथियाँ चंद्र की सटीक स्थिति से निकलती हैं। कुछ मिनट का अंतर भी कुंडली के हिस्से बदल सकता है, इसलिए कृपया अपना सबसे सटीक समय दें।

आपका जन्म विवरण केवल इस कुंडली की गणना के लिए उपयोग होता है और एन्क्रिप्ट करके रखा जाता है। मुफ़्त पाठ एक निजी लिंक से 30 दिनों तक उपलब्ध रहता है, और आप इसे कभी भी हटा सकते हैं।

यह कैसे काम करता है · 01

सब कुछ पृथ्वी के एक बिंदु से शुरू होता है

आपकी जन्म तिथि, सटीक समय और जन्म स्थान एक क्षण और एक स्थान तय करते हैं। उस दिन वहाँ जो समय क्षेत्र लागू था, हम वही निकालते हैं, ताकि आकाश ठीक वहीं से पढ़ा जाए जहाँ आपका जन्म हुआ।

02 · ग्रह

नौ ग्रह अपनी जगह लेते हैं

सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि, साथ में राहु और केतु, चंद्र के पात, निरयन राशिचक्र की बारह राशियों में अपनी जगह लेते हैं, जो स्थिर तारों से मापी जाती हैं। आपके जन्म के समय उदित राशि आपका पहला भाव बनती है।

03 · आपकी कुंडली

वैदिक कुंडली बनती है

बारह का वही वृत्त, चौकोर उत्तर भारतीय कुंडली में ढलता है। आपका लग्न ऊपर पहला भाव है; बाकी भाव घड़ी की उलटी दिशा में आते हैं, हर भाव में एक राशि, हर ग्रह अपनी जगह।

एक नमूना कुंडली, सांकेतिक रूप में: आकार और दूरियाँ पैमाने पर नहीं हैं।

मेरी कुंडली बनाएँ

आपकी वैदिक राशि अलग क्यों हो सकती है

पश्चिमी ज्योतिष सायन राशिचक्र का उपयोग करता है, जो हर वर्ष वसंत विषुव से शुरू होता है। वैदिक ज्योतिष निरयन राशिचक्र का उपयोग करता है, जो स्थिर तारों से मापा जाता है। सदियों में दोनों के बीच लगभग 24° का अंतर आ गया है।

इसीलिए कई ग्रह, अक्सर सूर्य भी, वैदिक कुंडली में एक राशि पहले पड़ते हैं। कोई भी कुंडली गलत नहीं है। ये दो परंपराएँ हैं जिनके आरंभ बिंदु अलग हैं, और हर एक को अपने ढंग से पढ़ा जाता है।

यह कुंडली लाहिड़ी अयनांश, पूर्ण राशि भाव (whole sign), राहु-केतु के लिए मध्यम पात और विंशोत्तरी दशा पद्धति का उपयोग करती है, जो ज्योतिष में सबसे अधिक प्रचलित विकल्प हैं।

पद्धति और भरोसा

एक पाठ जिसे आप जाँच सकते हैं

गणना और अर्थ अलग रखे जाते हैं, और आपकी कुंडली के पीछे का हर चुनाव साफ़ बताया जाता है।

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सटीक समय सबसे पहले

लग्न लगभग हर दो घंटे में और नवांश लगभग हर तेरह मिनट में बदलता है। हम गणना से पहले आपका सटीक समय पूछते हैं, और छूटा हुआ समय कभी अपनी ओर से नहीं भरते।

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गणना और अर्थ अलग-अलग

ग्रहों की स्थिति AstrologyAPI निकालता है; हम हर मान को ग्रहों के देशांतर से जाँचते हैं और एक ही कुंडली रखते हैं, जिसे मुफ़्त और संपूर्ण दोनों पाठ उपयोग करते हैं। पाठ खोलने पर गणना दोबारा नहीं होती।

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स्पष्ट, पारंपरिक चुनाव

लाहिड़ी अयनांश के साथ निरयन राशिचक्र, पूर्ण राशि भाव, राहु और केतु के लिए मध्यम पात, और विंशोत्तरी दशा: ज्योतिष में सबसे अधिक प्रचलित चुनाव।

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हमारे द्वारा लिखा, आशा भरे स्वर में

आपके पाठ का हर अंश हमारे द्वारा इस परंपरा के लिए लिखे गए पाठों से आता है, AI से नहीं। यह सावधानी से आगे देखता है और आध्यात्मिक मार्गदर्शन के लिए है, पेशेवर सलाह के लिए नहीं।

प्रश्न

नक्षत्र क्या है?

चंद्र जिस आकाश से गुज़रता है, उसे 27 चंद्र भवनों, यानी नक्षत्रों में बाँटा गया है, और हर नक्षत्र का अपना देवता और प्रतीक है। आपके जन्म के समय चंद्र जिस नक्षत्र में था, वही आपका जन्म नक्षत्र है, और यह वैदिक पाठ के सबसे निजी हिस्सों में से एक है।

दशा क्या है?

विंशोत्तरी पद्धति जीवन को नौ ग्रहों द्वारा शासित कालों में बाँटती है, जो 6 से 20 वर्ष लंबे होते हैं, और हर एक के भीतर छोटी अंतर्दशाएँ होती हैं। आपकी कुंडली दिखाती है कि आप अभी किस दशा में हैं और वह कब बदलती है।

कुंडली चौकोर क्यों है?

यह उत्तर भारतीय शैली है। बारह भाव अपनी जगह स्थिर रहते हैं, पहला भाव ऊपर बीच में होता है, और हर भाव में लिखा अंक उसकी राशि है (1 मेष, 12 मीन)। कुंडली के नीचे की तालिका यही स्थितियाँ शब्दों में बताती है।

क्या यह मेरी पश्चिमी जन्म कुंडली जैसी ही है?

नहीं। यह एक अलग परंपरा का अलग पाठ है। आप दोनों रख सकते हैं, और इन्हें एक में मिलाने के लिए नहीं बनाया गया है।